घंटी बजाता बाबा
हर रोज़ वही पुराना लबादा ओढ़े
आ जाता था शाम को
कभी मूँगफली , कभी काले चने
दे देता था सबको हाथ में
पैसे ना दो तो भी हँसता था
समझ नहीं आता आज क्या वो खुदा था ..

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