आँखों कि शरारत माफ़ हो,
मेरे प्यार का थोड़ा तो इंसाफ हो ।
क़ातिल नहीं हैं हम फिर भी क़ातिल है हम
यही तो उल्जन जिससे बेहाल हैं हम..

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